Short stories of love ( part-3) best short love stories

Short stories of love ( part-3) best short love stories

इस कहानी के पहले दो हिस्सों में हमने आपको सुप्रिया और प्रेम की प्रेम कहानी से रूबरू करवाया और साथ ही साथ दोनों को प्यार के पड़ावों से झुझते हुए दिखाया ,अब सुप्रिया और प्रेम की कहानी एक नया मोड़ लेने वाली थी ये मै इसलिए बोल रही हूँ क्योकि दोनों को अब प्यार के मुश्किल पड़ावों को पार करना था और अपने रिश्ते को ख़राब नहीं होने देना था लेकिन इन्हे अपने रिश्ते बचाते बचाते बहुत सी चीज़े सिखने को मिलने वाली थी अब वो चीज़े क्या थी क्या हुआ इनकी कहानी मै आगे वो आज मै आपको बताउंगी लेकिन अगर अब तक आपने इस कहानी के पहले दो हिस्सों को नहीं पढ़ा है तो प्लीज वो भी जरूर पढ़े:
Short stories of love
Short Stories of love part -2

Short Stories of love ( Part-3) best short love stories, best romantic short stories

सुप्रिया को ऋषिकेश आये एक महीना हो चूका था दोनों मे अब बस दिल्ली और ऋषिकेश की दुरी नहीं थी अब दोनों में एक और चीज़ की दुरी आ गयी थी और वो दुरी थी दोनों के प्यार की


सुप्रिया को अपने नये दोस्त और जॉब इंटरव्यू की वजह से प्रेम के लिए समय नहीं मिलता था सुप्रिया मुश्किल से प्रेम के लिए बस अब 1 घंटा भी मुश्किल से निकाल पाती थी
जो लोग पुरे पुरे दिन बात करते थे अब बस उन् दोनों के बीच बस एक घंटे का समय था जो सुप्रिया प्रेम को देती थी

अब दोनों के बीच ना वो प्यार वाली बाते थी, ना वो नोक झोक के पीछे की मिठास, थी तो बस दोनों के बीच एक चीज़ थी गलतफमी

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प्रेम को लगता था की सुप्रिया अपने नये दोस्तों के साथ रह कर उसे भूलने लगी है और सुप्रिया को ये लगता था की प्रेम उसे समझ नहीं रहाऔर यही गलत फमी दोनों के बीच तकरार बढ़ा रही थी


अब आगे हुआ क्या सुप्रिया का सुबह 5 बजे प्रेम के पास फ़ोन आया


सुप्रिया : सुनो


प्रेम : बोलो आज इतनी सुबह कैसे

सुप्रिया : मैं अपने दोस्तों के साथ एक मन्दिर जा रही हूँ , थोड़ी दुरी पे है 3-4 घंटे लगेंगे आने जाने और दर्शन करने मे


प्रेम: ओके तो मुझे क्यों बता रही हो, नये दोस्तों को बता दिया ना बस

सुप्रिया : उन्ही के साथ जा रही हूँ
और तुम्हे बस इसलिए बता रही हूँ की तुम कॉल करके मुझे परेशान ना करो
प्रेम: ओह नहीं जाना


सुप्रिया : बता रही हूँ पूछ नहीं रही ओके

प्रेम : हां हां जानता हूँ मुझे कोई शोक नहीं तुमसे अपनी बेज़त्ती करवाने का मैं बस इसलिए मना कर रहा हूँ क्योकि आज 12 बजे तुम्हारा इंटरव्यू है

और जानती हो ना अगर लेट हो गयी या इंटरव्यू अच्छे से नहीं हुआ तो दिल्ली वापिस आना पड़ेगा ये आखरी मौका है तो रेडी हो तैयारी करो जाने से बढिया

सुप्रिया : तुम टेंशन मत लो मेरी, मै खुद का देख लुंगी


प्रेम : ओके जैसी तुम्हारी मर्ज़ी


ये कहके प्रेम ने फ़ोन कट कर दिया, सुप्रिया ने भी प्रेम की बात नहीं मानी और चली गयी दोस्तों के साथ

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अब 10 बज रहे थे सुप्रिया खुश थी की शांति से उसके दर्शन हो गए और अब वो समय पे अपने इंटरव्यू के लिए पहोच जाएगी


लेकिन कहते है ना की कभी कबर अक्ल ठीकाने पर लाने के लिए ऊपर वाला कुछ करता है
रस्ते मे अब मिल गया जाम , भड़ी जाम देख सुप्रिया की टेंशन होने लगी थी

11 बज चुके थे लेकिन जाम खुलने का नाम नहीं ले रहा था सुप्रिया परेशान की अब क्या करे क्योकि अब वो चाह के भी इंटरव्यू के लिए नहीं पहोच सकती थी क्योकि अभी आधे से 45 मिनट का रास्ता और था

परेशान सुप्रिया ने रोते रोते प्रेम को कॉल किया , प्रेम ने फ़ोन उठाया


प्रेम : हो आयी अपने नये दोस्तों के साथ


सुप्रिया : प्रेम यार

प्रेम : अरे क्या हुआ रो क्यों रही हो


सुप्रिया : यार मेरा इंटरव्यू मिस हो गया मै भड़ी जाम में फस गयी हूँ
Am sorry मैंने तुम्हारी बात नहीं सुनी और उल्टा भी सुनाया


प्रेम : कोई नहीं यार बस चुप हो जाओ


सुप्रिया : यार अब घर वाले बुला लेंगे मुझे नहीं आना यार अभी

प्रेम : नहीं बुलाएंगे सुनो जहाँ इंटरव्यू था वहाँ पे कॉल करो और उन्हें सब बताओ


सुप्रिया : नहीं सुनेंगे यार वो

प्रेम : क्यों नहीं सुनेंगे, अभी मंदिर हो के आयी हो भगवान का नाम लो और उन्हें सब बताओ और टाइम चेंज करवा लो


सुप्रिया : नहीं यार


प्रेम : यार मुझ पर भरोसा रखो बात करके तो देखो

सुप्रिया : ओके करती हूँ

जैसे की मैंने आपको बताया था ना की अक्ल थीकाने लाने के लिए कभी कबर उपर वाला कुछ करता है लेकिन जैसे ही हमारी अकल ठीकाने आ जाती है भगवान हमारे लिए रास्ते खोल देता है तो अब हुआ क्या सुप्रिया ने कॉल किया उन्हें सब बताया समझाया काफी तब जाके वो माने और उन्होंने इंटरव्यू का समय १ बजे कर दिया

सुप्रिया ने वापिस प्रेम को कॉल किया :


प्रेम : क्या हुआ जल्दी बताओ


सुप्रिया : मान गए वो


प्रेम : देखा मैने बोला था ना

सुप्रिया : हां अच्छा सुनो


प्रेम : बोलो

सुप्रिया : सॉरी


प्रेम : अरे क्यों


सुप्रिया : मैं यहाँ आ के बदल गयी ना तुमसे बात करती ना समय देती और ना ही तुम्हारी बात मानती


प्रेम : ऍम आल्सो सॉरी


सुप्रिया : अरे क्यों


प्रेम : तुम मुझसे बात नहीं कर पाती थी इसलिए तुमसे गुसा हो जाता था ये नहीं की तुम्हे समझू और साथ रहूं


सुप्रिया : लव यू यार

प्रेम : लव यू टू जी

तो जी कुछ इस तरीके से किया प्रेम और सुप्रिया ने प्यार का दूसरा पड़ाव दर्द पार किया
हां मानती हूँ की अभी पहला पड़ाव बाकी क्योकि वो पड़ाव तो तभी पार होगा जब बहुत सारे इंतजार के बाद सुप्रिया दिल्ली लौटेगी

इतनी ही थी ये कहानी अगर आपको पसंद आये तो कमेंट और शेयर जरूर करे और इस कहानी का पहला और दूसरा पार्ट भी जरूर पढ़े:
( Short stories of love)
( Short stories of love Part -2 )

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Mehak Bhatia

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