Short stories of love ( part-2) romantic short stories

Short stories of love ( part-2) romantic short stories

जैसे की इस कहानी के पहले हिस्से मैं मैंने आपको बताया था की सुप्रिया ऋषिकेश जा रही थी जहाँ जाना उसका बचपन का सपना था
लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए उसे अपनी मोहब्बत को दिल्ली अकेले छोड़ के जाना पर रहा था
प्रेम से दुरी का दुख सुप्रिया को था लेकिन अपने सपने को पूरा करने की खुशी ज्यादा थी
सुप्रिया के पास एक वजह थी थोड़ा खुश होने की लेकिन प्रेम के पास नहीं क्योकि प्रेम के लिए तो उसकी मोहब्बत उसका सपना सब कुछ सुप्रिया थी
लेकिन शयाद सुप्रिया इस बात को समझ नहीं पा रही थी इसलिए वो चली गयी ऋषिकेश
ऋषिकेश जाने के बाद सुप्रिया और प्रेम की कहानी में क्या हुआ ये आपको आज पता चलेगा लेकिन उसे पहले अगर अपने इस कहानी का पहला भाग Short stories of love नहीं पढ़ा है तो प्लीज इस लिंक को क्लिक करके
पढ़े और पूरी कहानी का दिलचस्‍प उठा सके

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अगले दिन इस कहानी की शुरुआत कुछ इस तरीके से हुई की सुप्रिया अभी अभी ऋषिकेश पहोची ही थी की तभी परेशान प्रेम का कॉल आ गया

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प्रेम : पहोच गयी तुम

सुप्रिया : हां बाबा पहोच गयी


प्रेम : तो फ़ोन करके बताना नहीं होता बोला था ना

सुप्रिया : अरे अभी पहोची हूँ


प्रेम : ठीक है कुछ तकलीफ हो तो बताना

सुप्रिया : क्या यार तुम्हे खुद पता है तुम ये बात कितनी बार मुझसे बोल चुके हो


प्रेम : अच्छा ओके अब नहीं बोलूंगा अच्छा सुनो


सुप्रिया : बोलो महाराज


प्रेम : अब सीधा हॉस्टल पहोच के कॉल करना समझी


सुप्रिया : नहीं जी


प्रेम : क्यों

सुप्रिया : अब तुम सोओगे और मुझे भी सोने दोगे समझे, रात से जब से ट्रेन में बैठी हूँ तब से हज़ार कॉल तुम मुझे कर चुके हूँ ना सोये ना सोने दिया


प्रेम : अच्छा ठीक है नहीं करूँगा लेकिन सुनो

सुप्रिया : लेकिन वेकिन कुछ नहीं अब तुम्हे मेरी कसम है जब तक में कॉल नहीं करती तुम नहीं करोगे और अब शांति से सोओगे


प्रेम : हां ओके लेकिन कर देना याद से कॉल समझी


सुप्रिया : अरे हां बाबा अब जाओ

इसके बाद सुप्रिया की बात मान प्रेम ने फ़ोन रख दिया और वापिस कॉल नहीं किया और सो गया

अब श्याम होने को थी सुप्रिया का अब तक एक भी कॉल नहीं आया था
प्रेम परेशान, वो एक बड़ी धुविद्या में था ना वो फ़ोन कर सकता था ना सुप्रिया की कॉल आ रही थी

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प्रेम की चिन्ता – घबराहट हर बीत ते समय के साथ बढ़ती जा रही थी

सुप्रिया का इंतज़ार करते करते रात हो आयी थी 9 बज चुके थे
घड़ी की चलती टीक-टीक के साथ प्रेम की घबराहट बढ़ती जा रही थी उसका डर बड़ा रही थी की तभी प्रेम का फ़ोन रिंग हुआ और वो कॉल था सुप्रिया का, प्रेम ने कॉल उठाया और बस हो गया शुरू

प्रेम: कैसी हो यार हद होती है
सुबह से कसम दे रखी है

ना मै कॉल कर सकता ना तुम्हारी कॉल आ रही,
अच्छा ये छोड़ो ये बताओ कैसी हो
ठीक तो हो
कोई दिक्कत तो नहीं,
क्या हुआ अब कुछ बोलोगी ?
अरे मैं कुछ पूछ रहा हूँ

सुप्रिया : तुमने मुझे अब तक बोलने का मोका दिया बस कॉल उठाते ही शुरू


प्रेम: अच्छा ना यार सॉरी अब बताओ ठीक तो हो ना


कोई दिक्कत परेशानी तो नहीं

सुप्रिया : नहीं रे मेरी जान में बिलकुल ठीक हूँ और यार तुम देख तो चुके हो इस जगह को फिर भी टेंशन


प्रेम : यार फिर भी


सुप्रिया : क्या फिर भी


प्रेम : छोड़ो यार तुम नहीं समझोगी


सुप्रिया : अच्छा जी मै नहीं समझूंगी तो कौन समझेगा मेरी जान को


प्रेम: मिस यू सुप्रिया मेरा गोलगप्पा जल्दी आ जा यार

सुप्रिया : अच्छा जी तो मिस किया जा रहा है हमे


प्रेम : क्या अच्छा जी यार वैसे ना तुम बड़ी गंदी हो खुद चली गयी अकेले अकेले मुझे छोड़ गयी


सुप्रिया : अकेले कहा छोड़ा अपना इतना कीमती दिल तुम्हे देके गयी हूँ


प्रेम : अच्छा जी जानती हो मै कैसे मानूँगा बहुत ब्लैकमेल नहीं करती तुम मुझे


सुप्रिया : हो- हो ……… मैंने कब किया

प्रेम : हां हां बिलकुल अच्छा ना ये सब छोड़ो पहले ये बताओ सुबह से कॉल क्यों नहीं किया


सुप्रिया : अरे यार वो हुआ क्या मैं बड़ी थक सी गयी थी तो सो गयी


प्रेम : यार सुबह से सो रही हो

सुप्रिया : अरे नहीं बाबा ४ बजे उठ गयी थी लेकिन जैसे ही उठी तो हुआ किया हॉस्टल के सब लोग बहार जा रहे थे
तो चली गयी


प्रेम : बहुत खूब आज ही ऋषिकेश गयी हो और आज ही अजनबी लोगो के साथ घूमने

सुप्रिया : यार करती भी क्या हॉस्टल के सब लोग जा रहे थे अकेले रुक क्या करती
और वैसे भी अब इन्ही के साथ रहना है तो इनसे दोस्ती तो बनानी होगी


प्रेम : यार फिर भी प्लीज अगली बार मत जाना अभी सब नये है

सुप्रिया : ओके जी अच्छा सुनो अब कल मिलती हूँ खाना खाने जा रही हूँ


प्रेम : तो आके बात नहीं कर सकती

सुप्रिया : नहीं जी यार यह सब नये है इनसे बात करुँगी तभी तो जानूँगी


प्रेम : चलो ठीक है ध्यान रखना और हां समय से सो जाना

सुप्रिया : ओके मेरी जान अब कल बात करते है


प्रेम : ओके लव यू मेरा गोलगप्पा

सुप्रिया : लव यू टू मेरे गोलगप्पा

अब आप सोच रहे होंगे की इन दोनों ने प्यार का पहला पड़ाव तो पार किया नहीं और अभी से दूसरे पड़ाव इनके सामने आ गया है अभी बस एक दिन हुआ है और प्रेम की सुप्रिया से दुरी उसके दर्द, तकलीफ का कारण बन रही है प्रेम के पास अब बस सुप्रिया का इंतजार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था

तो अब इस कहानी में जानें वाली बात ये है की क्या प्रेम सुप्रिया का इंतजार कर पायेगा और क्या सुप्रिया से दुरी बर्दाश कर पायेगा या नहीं
आगे क्या होता है वो मैं आपको बताउंगी इस कहानी के अगले पार्ट में
( Short stoires of love part-3 )

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Mehak Bhatia

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