Relation between child and parent a short story ( short motivational stories in hindi with moral )

Relation between child and parent a short story ( short motivational stories in hindi with moral )

बच्चो की चाहतों को पूरा करते करते माँ – बाप अपनी चाहतो को ही खो देते है उनकी खुशी के लिए अपनी खुशी को ही कुर्बान करदेते है तभी वो बोलते है की तुमने हमारे लिए किया क्या अरे कोई उनको जाके बताये उनकी ज़िन्दगी को पूरा करने के लिए माँ- बाप खुद को ही अधूरा छोर देते है

short motivational stories in hindi with moral

आज मै आपके साथ एक ऐसी कहानी साझा करने जा रही हूँ जो ज़िन्दगी की एक कड़वी सचाई है और हर एक इंसान इस कड़वी सचाई को एक फ़ेज़ के बाद जरूर झेलता है तो चलिए शुरू करते है ( short motivational stories in hindi with moral )

इस कहानी की शुरुआत होती एक फ़ोन कॉल से जो अंकित की माँ ने उसे की होती है

बेटा : हां बोलो माँ , क्यों फ़ोन कर रही हो समाझ नहीं आता बहुत काम है मुझे

माँ : बेटा तेरी याद आ रही थी इतना टाइम हो गया जबसे परदेश गया है तब से हमे भूल गया है

बेटा : माँ भूलो मत यह आपने ही मुझे भेजा है अब पढ़ रहा हूँ तो कॉल ड्रामा, भूल गए क्या ये सब क्या है माँ,

अब कॉल मत करना

और फ़ोन कट कर दिया कितनी अजीब चीज़े होती है ना जब बच्चे बड़े हो जाते है भूल जाते है की क्या कर रहे है और किसको जवाब दे रहे है

हमेशा अंकित की माँ अंकित को कॉल करती
लेकिन अंकित तो थरा व्यस्त इंसान बेचारा पढ़ रहा था पढ़ते-पढ़ते यही भूल गया था की उसके माँ बाप है

ये सब देख कर अंकित की माँ को काफी तकलीफ हो रही थी अंकित की ये दूरी उन्हें दिन रात सताए जा रही थी इसलिए अब वो बस अंकित की यादो, उसकी लिखी डेरी के सहारे जी रही थी जिसमे अंकित पढ़ लिख बड़ा आदमी बने के सपने बुनता था और वो देख उसकी माँ खुश होती थी

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लेकिन अब उन्ही सपनो के पूरा होने पर उन्हें तकलीफ हो रही थी इसके अगले दिन अंकित के पापा की तबीयत ख़राब होने लगी उन्होंने तुरंत अंकित को कॉल किया और बोला

अंकित तेरे पापा की तबीयत काफी ख़राब है वापिस आजा उन्हें तेरी जरुरत है

अंकित: क्या माँ तबियत ही ख़राब है ना मरे तो नहीं मै आपको कुछ पैसे भेज रहा हु करवा लेना उनका इलाज

ये सुनकर अंकित की माँ ने फ़ोन रख कर दिया

एक महीने बाद जब अंकित ने अपनी माँ को कॉल किया तभी उसकी माँ ने उसका कॉल नहीं उठाया जिसके बाद अंकित काफी परेशान हो गया क्योकि आज ना ही उसकी माँ ने उसकी कॉल उठाई और ना ही उस दिन के बाद उसे कॉल की, यही सब सोचते हुए की उसके माँ बाप को कुछ हो ना गया हो उसने इंडिया की टिकट बुक करवाई और घर लौटा का टिकट बुक करवाया और घर लौटा

जब अंकित घर पूछा वो अपनी माँ को गले लगा कर रोने लगा और बोला आप मेरा फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे था ना ही कर रहे थे भूल गए थे

तब उसकी माँ ने जवाब दिया तू ही परेशान था हमारे से जब करती थी तो बात भी नहीं करता था

माफ़ करदो माँ मुझे

ये देख अंकित की माँ अंकित को चुप करवाती है और बोलती है अंकित गलती तेरी नहीं गलती मेरी है मैंने तेरे को ये तो सीखा दिया की तेरे को पड़ना लिखना है लेकिन ये कभी नहीं सिखाया की पड़ने लिखने के बाद उन्हें भी याद रखना है जिसने तेरे को क़ाबिल बनाया ,

इसके बाद अंकित को अपनी गलतियों का एहसास हुआ और उसने दुबारा अपनी इस गलती को नहीं दोहराया

ये कहानी माँ बाप और एक बच्चे को ज़िन्दगी का एक नया सबक सिखाती है और ये बताती है की ज़िन्दगी में हर एक इंसान को एक बार इस फ़ेज़ से निकलना पड़ता है

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Mehak Bhatia

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