न हम दोस्त न हम हमसफर (best love poems)

न हम दोस्त न हम हमसफर (best love poems)

best love poems (famous short love poems)

न मैं सीता हूँ न तुम राम,
न मैं राधा हूँ न तुम मेरे
घनश्याम

न हम दोस्त न हमसफर,
फिर कैसी हमारी मंजिल और कैसी हमारी डगर

न मुझे तुमसे प्यार है न तुम्हें मुझसे प्यार,
फिर कैसी ये नोक झोंक और कैसी तकरार

हमसफर न सही दोस्त ही कह दिया होता, मुझसे बात करने का कोई तो सिला दिया होता

जिंदगी तुम्हें मुस्कुराता देख कर गुजार दी होती,
जो एक बार तुमने प्यार से सजनी कहा होता

मैं तुम्हारी जान हूँ ये कैसे मान लूँ,
कभी तो इस जान को थोड़ा प्यार दिया होता

जानती हूँ कि तुम्हारी आँखें बहुत कुछ कहती है,
अपनी जुबाँ से भी तो कभी इकरार किया होता

मैं राह में पड़ी एक शिला मात्र हूँ,
रुक कर मुझे तुमने तराश लिया होता

नही कहती मैं कि जीवन भर की कसम लो,
दो घड़ी के लिए ही सही मुझे थाम लिया होता

नही कहती मैं कि जीवन भर की कसम लो,
दो घड़ी के लिए ही सही मुझे थाम लिया होता

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Mehak Bhatia

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